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Call और Put Options क्या है ? | कॉल और पुट ऑप्शन कब ख़रीदे | Call vs Put

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  • July 24, 2023August 25, 2023
  • Princess Ritu

Call aur Put Options kya hain ? Call vs Put Options , Call options kya hain, Put Options kya hain,कॉल ऑप्शन क्या है , पुट ऑप्शन क्या है , कॉल और पुट ऑप्शन में अंतर क्या है – शेयर मार्केट का जब नाम आता है तो आपने ऑप्शन ट्रेडिंग का नाम भी जरूर सुना होगा । ऑप्शन ट्रेडिंग एक बहुत ही अच्छा तरीका है जिससे आप शेयर मार्केट में पैसे कमा सकते हैं ।

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ऑप्शन ट्रेडिंग में आपने कॉल और पुट के बारे में सुना होगा । आज के इस आर्टिकल में Call ऑप्शन और Put Options के बारे में बात करेंगे और जानेंगे कि कॉल और पुट ऑप्शन क्या है, Call और Put Options में क्या अंतर है ? तो आइए जानते हैं Call और Put Options को –

Call और Put Options को समझने से पहले आपको यह समझना होगा कि ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है, ऑप्शन ट्रेडिंग किसे कहते हैं ? ऑप्शन ट्रेडिंग के प्रकार कौन-कौन से हैं ?

ऑप्शन क्या होता हैं ? ( What is Options in Hindi )

Options को हिंदी में विकल्प कहते हैं । Options एक डेरिवेटिव Contract होता हैं जो Underlying Asset की कीमत बढ़ने या कम होने पर उसे पैसे कमाने का अधिकार देता है। शेयर मार्केट में ऑप्शन का प्रयोग ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए किया जाता है। इसमें ट्रेडर्स का मकसद कॉल और पुट दो प्रकार के ऑप्शन को ट्रेड करके पैसे कमाना होता है।

ऑप्शंस का यह फायदा है कि आपको Underlying Asset को खरीदने या बेचने के लिए पूरा पैसा नहीं देना पड़ता बल्कि एक छोटा सा प्रीमियम अमाउंट देना होता है फिर जब मार्केट में शेयर की कीमत आपके अनुसार बढ़ती या घटती है तो आपको प्रॉफिट होता है।

ऑप्शंस उनके लिए फायदेमंद है जो कम पैसों से रिटर्न कमाना चाहते हैं। एक बार कोई ऑप्शन खरीदने के बाद आपको उससे Expiry Date से पहले बेचना होता है। स्टॉक की एक्सपायरी डेट मंथली होती है जो महीने के अंतिम गुरुवार को जबकि इंडेक्स का एक्सपायरी डेट हर गुरुवार को होती है।

यह भी पढ़े – Option Buying करें या Option Selling | ऑप्शन बाइंग और सेलिंग में अंतर

ऑप्शन के प्रकार ( Types of Options in Hindi )

ऑप्शंस दो प्रकार के होते हैं। पहला है Call Options और दूसरा है Put Options . Call ऑप्शन का शॉर्ट फॉर्म CE ( Call European ) है और Put ऑप्शन का शॉर्ट फॉर्म PE ( Put European ) हैं ।

शेयर मार्केट में जब बाजार ऊपर जाता है तो कॉल ऑप्शंस खरीदा जाता है और जब बाजार नीचे जाता है तो पुट ऑप्शंस खरीदा जाता है मतलब कि जब आपको लगे कि बाजार ऊपर जाएगा तो आप कॉल ऑप्शन खरीदे और जब आपको लगे कि बाजार नीचे की तरफ जाएगा तो आप पुट ऑप्शन खरीदें।

इस प्रकार का कॉल ऑप्शन खरीदने वाले को प्रॉफिट तब होता है जब मार्केट ऊपर जाता है और पुट ऑप्शन खरीदने पर प्रॉफिट तब होता है जब मार्केट नीचे जाता है।

कॉल ऑप्शन क्या है ( What is Call Option in Hindi )

कॉल ऑप्शन एक कॉन्ट्रैक्ट है जो ऑप्शन Buyer को किसी Specific टाइम पीरियड के अंदर Specific प्राइस पर Underlying Asset खरीदने का अधिकार देता है। लेकिन जरूरी नहीं है कि ऑप्शन Buyer को खरीदना ही पड़े । Underlying Asset मतलब स्टॉक , बॉन्ड ,कमोडिटी , आदि ।

कॉल ऑप्शन खरीदने पर ऑप्शन Buyer को प्रॉफिट तब होता है जब Underlying Asset का प्राइस बढ़ता है। जिस specific प्राइस पर कॉल ऑप्शन खरीदा जाता है उसे Strike प्राइस कहते हैं ।

जिस स्पेसिफिक टाइम पीरियड के दौरान ऑप्शन को बेचा जाता है उसे ऑप्शन की एक्सपायरी डेट कहते हैं। ऑप्शन को खरीदने के लिए आपको जो अमाउंट देना पड़ता है उसे प्रीमियम कहते हैं। यह वही अमाउंट होता है जितना आप प्रत्येक शेयर पर ज्यादा से ज्यादा लॉस कर सकते हैं।

स्टॉक की एक्सपायरी डेट मंथली होती है जो महीने के अंतिम गुरुवार को जबकि इंडेक्स का एक्सपायरी डेट हर गुरुवार को होती है।

यह भी पढ़े –Option Trading क्या है ? | ऑप्शन ट्रेडिंग कैसे करें

कॉल ऑप्शन कब ख़रीदे ( when to buy Call Option )

कॉल ऑप्शन उस समय खरीदना चाहिए जब शेयर मार्केट ऊपर जा रहा होता है, अगर किसी दिन बाजार ऊपर जाता है तो आप निफ़्टी या बैंक निफ़्टी से कॉल ऑप्शन खरीद कर प्रॉफिट कर सकते हैं।

कॉल ऑप्शन कैसे काम करता हैं ( How call Options work )

कॉल ऑप्शन एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के रूप में काम करता है। जब आप किसी शेयर का कॉल ऑप्शन खरीदते हैं तो इसका मतलब है कि आप शेर का प्राइस बढ़ने पर उस पर दांव लगा रहे हैं। लोग शेयर खरीदने की बजाय उसका ऑप्शन इसलिए भी खरीदते हैं क्योंकि इसकी कीमत शेयर की अपेक्षा बहुत कम होती है जिससे आपको कम निवेश में अधिक क्वांटिटी खरीदने का मौका मिल जाता है।

कॉल ऑप्शन आप कम पैसों से खरीद सकते हैं लेकिन जब आप पुट ऑप्शन को खरीदने जाते हैं तो आपको अधिक पैसों की जरूरत पड़ती है। इसलिए अधिकतर लोग कॉल ऑप्शन को खरीदना पसंद करते हैं।

यह भी पढ़े – Nifty क्या है | निफ्टी में इन्वेस्ट (ट्रेडिंग) कैसे करें

पुट ऑप्शन क्या है ( What is Put Option in Hindi ) )

Put Options तब खरीदा जाता है जब यह लगता है कि बैंकिंग सेक्टर में गिरावट होने वाली है या फिर जब शेयर का प्राइस नीचे जाने वाला होता है तब पुट ऑप्शन खरीदा जाता है क्योंकि Put Options में उस समय आपको प्रॉफिट होता है जब शेयर का प्राइस कम होता है और कॉल ऑप्शन में जब शेयर का प्राइस बढ़ता है तब प्रॉफिट होता है।

जब आप Put Options खरीदते हैं और बैंक निफ़्टी नीचे जाता है तब उसमें गिरावट होने के बाद आपको प्रॉफिट होता है। और लेकिन अगर आपका अनुमान गलत हो गया और बैंकनिफ्टी ऊपर चला गया तो आपको नुकसान हो सकता है।

Put Options ,कॉल ऑप्शन का उल्टा होता हैं। पुट ऑप्शन भी भी एक फाइनेंसियल कॉन्ट्रैक्ट है। अगर आप ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते हैं तो आप ITM या ATM पर ही Put Options ख़रीदे । जब आप Put Options खरीदते हैं तो इसका मतलब है कि आप उसे एसेट के गिरने पर दाव लगा रहे हैं।

यह भी पढ़े – Sensex क्या है | Share Market में सेंसेक्स कैसे काम करता है

पुट ऑप्शन कब ख़रीदे ( When to buy Put Option )

Put Options तब खरीदना चाहिए जब मार्केट में गिरावट होती हैं। मतलब जब शेयर बाजार गिरता है तो Option Buyer को पुट ऑप्शन खरीदना चाहिए। अगर किसी दिन मार्केट में पैनिक सेलिंग होती है तो उस दिन आप पुट ऑप्शन को ट्रेड करके अच्छा प्रॉफिट कमा सकते हैं।

पुट ऑप्शन कैसे काम करता हैं ( ( How Put Options work ) )

Put Options भी एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट जैसा काम करता हैं। जब शेयर का प्राइस गिरता है तब आपको इससे प्रॉफिट कमाने का अवसर मिलता हैं। शेयर के अलावा आप निफ़्टी और बैंक निफ़्टी का पुट ऑप्शन खरीद कर प्रॉफिट कमा सकते हैं।

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कॉल और पुट ऑप्शन में क्या अंतर है ( What is the difference between call and put option )

कॉल और पुट ऑप्शन्स में अंतर इस प्रकार हैं –

  • जब मार्केट में मंदी होती हैं तो लोग बहुत जल्दी से पैनिक सेलिंग करते हैं उस समय कॉल के बजाय पुट ऑप्शन खरीदना चाहिए ।
  • दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह हैं कि कॉल ऑप्शन तब खरीदा जाता हैं जब शेयर का प्राइस बढ़ता है और पुट ऑप्शन तब खरीदा जाता हैं जब शेयर की कीमत घटती हैं ।
  • कॉल और पुट ऑप्शन को आप Spread Strategy बनाकर एक साथ भी खरीद सकते हैं ।
  • कॉल ऑप्शन किसी शेयर की कीमत बढ़ने पर दांव लगाने का कॉन्ट्रैक्ट है जबकि पुट ऑप्शन किसी शेयर की कीमत गिरने पर दाव लगाने का ऑप्शन है।
  • ऑप्शन विक्रेता को मार्केट ऊपर जाने पर पुट ऑप्शन बेचना चाहिए और मार्केट नीचे जाने पर कॉल ऑप्शन बेचना चाहिए।

कॉल और पुट ऑप्शन कैसे सीखें ( How to learn call and put options )

कॉल और Put Options को आप कुछ इस प्रकार समझ सकते हैं कि इनकी खुद की कोई वैल्यू नहीं होती है बल्कि यह अपनी वैल्यू किसी अन्य इंस्ट्रूमेंट से derive करते हैं, और इसीलिए इनको डेरिवेटिव बोला जाता है।

अगर आप डेरिवेटिव मार्केट यानी फ्यूचर एंड ऑप्शन को समझते हैं तो आपके लिए कॉल और पुट ऑप्शन को समझना बहुत आसान होगा।

यह भी पढ़े – Share Market में इनवेस्ट कैसे करें | शेयर कैसे खरीदे और बेचे

FAQ Checklist

कॉल या पुट ऑप्शन कैसे चुने ?

कॉल या पुट ऑप्शन चुनने के लिए आपको मार्केट रिसर्च करना होगा। अगर बाजार अपने सपोर्ट लेवल पर है और अब बढ़ने वाला है तो आपको कॉल ऑप्शन खरीदना चाहिए लेकिन अगर बाजार अपने रेजिस्टेंस लेवल को टच करके नीचे आ रहा है तो पुट ऑप्शन खरीदना बेहतर होगा।

पुट और कॉल ऑप्शन की एक्सपायरी डेट के बाद क्या होता है?

कॉल और पुट ऑप्शन की एक्सपायरी डेट यानि समाप्ति तिथि के बाद आपने जो ऑप्शन खरीदा था उसकी वैल्यू जीरो हो जाती है। इसीलिए समाप्ति तिथि से पहले आपको अपने खरीदे गए सभी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को बेच देना चाहिए।

ऑप्शन क्या होता हैं ?

Options को हिंदी में विकल्प कहते हैं । Options एक डेरिवेटिव Contract होता हैं जो Underlying Asset की कीमत बढ़ने या कम होने पर उसे पैसे कमाने का अधिकार देता है। शेयर मार्केट में ऑप्शन का प्रयोग ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए किया जाता है। इसमें ट्रेडर्स का मकसद कॉल और पुट दो प्रकार के ऑप्शन को ट्रेड करके पैसे कमाना होता है।

पुट ऑप्शन क्या है ?

Put Options एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट जैसा काम करता हैं। जब शेयर का प्राइस गिरता है तब आपको इससे प्रॉफिट कमाने का अवसर मिलता हैं। शेयर के अलावा आप निफ़्टी और बैंक निफ़्टी का पुट ऑप्शन खरीद कर प्रॉफिट कमा सकते हैं।

कॉल ऑप्शन कब ख़रीदे ?

कॉल ऑप्शन उस समय खरीदना चाहिए जब शेयर मार्केट ऊपर जा रहा होता है, अगर किसी दिन बाजार ऊपर जाता है तो आप निफ़्टी या बैंक निफ़्टी से कॉल ऑप्शन खरीद कर प्रॉफिट कर सकते हैं।

कॉल ऑप्शन कैसे काम करता हैं ?

कॉल ऑप्शन एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के रूप में काम करता है। जब आप किसी शेयर का कॉल ऑप्शन खरीदते हैं तो इसका मतलब है कि आप शेर का प्राइस बढ़ने पर उस पर दांव लगा रहे हैं। लोग शेयर खरीदने की बजाय उसका ऑप्शन इसलिए भी खरीदते हैं क्योंकि इसकी कीमत शेयर की अपेक्षा बहुत कम होती है जिससे आपको कम निवेश में अधिक क्वांटिटी खरीदने का मौका मिल जाता है।

ऑप्शंस कितने प्रकार की होती है ?

ऑप्शंस दो प्रकार के होते हैं। पहला है कॉल ऑप्शन और दूसरा है पुट ऑप्शन । Call ऑप्शन का शॉर्ट फॉर्म CE ( Call European ) है और Put ऑप्शन का शॉर्ट फॉर्म PE ( Put European ) हैं ।

पुट ऑप्शन कब ख़रीदे ?

Put Options तब खरीदना चाहिए जब मार्केट में गिरावट होती हैं। मतलब जब शेयर बाजार गिरता है तो Option Buyer को पुट ऑप्शन खरीदना चाहिए। अगर किसी दिन मार्केट में पैनिक सेलिंग होती है तो उस दिन आप पुट ऑप्शन को ट्रेड करके अच्छा प्रॉफिट कमा सकते हैं।

कॉल और पुट ऑप्शन में क्या अंतर है ?

जब मार्केट में मंदी होती हैं तो लोग बहुत जल्दी से पैनिक सेलिंग करते हैं उस समय कॉल के बजाय पुट ऑप्शन खरीदना चाहिए ।
दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह हैं कि कॉल ऑप्शन तब खरीदा जाता हैं जब शेयर का प्राइस बढ़ता है और Put Options तब खरीदा जाता हैं जब शेयर की कीमत घटती हैं ।

कॉल और पुट ऑप्शन कैसे सीखें ?

कॉल और पुट ऑप्शन को आप कुछ इस प्रकार समझ सकते हैं कि इनकी खुद की कोई वैल्यू नहीं होती है बल्कि यह अपनी वैल्यू किसी अन्य इंस्ट्रूमेंट से derive करते हैं, और इसीलिए इनको डेरिवेटिव बोला जाता है।
अगर आप डेरिवेटिव मार्केट यानी फ्यूचर एंड ऑप्शन को समझते हैं तो आपके लिए कॉल और Put Options को समझना बहुत आसान होगा।

और पढ़े –

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